sherKuch Alfaaz

नशे के हाल में जिस रोज़ मुझ को घर उतारा था जफ़ा-जू ने मिरे दिल से ख़ुदा का डर उतारा था बड़ा मासूम लगता था उसे हम दोस्त कहते थे मिरी तलवार से जिस ने मिरा ही सर उतारा था

More from Nikhil Tiwari 'Nazeel'

ज़ुल्म के क़िस्से सुनाए जब कभी तफ़्सीर से ख़ून धीरे से उतर आया मिरी तस्वीर से मैं ज़मीं से यूँँ लिपट कर रो नहीं सकता फ़क़त आसमाँ ने बाँध रक्खा है मुझे ज़ंजीर से

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

0 likes

यूँँ तख़्त-गाह से रब का तबादला देखा इसी बिना पे फ़रिश्तों में फ़ासला देखा

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

0 likes

पूछना हाल दिखे जब भी परेशाँ होते थक गया है तिरा ये शहर फ़रोज़ाँ होते

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

0 likes

साज़िशें हज़ार कर तू मौत से लड़ा मुझे ऐ मिरे अज़ीज़ एक मर्तबा हरा मुझे मुस्कुराते दिन के सुख से अब मुझे है क्या ग़रज़ तू उदास शाम की वो सिसकियाँ गिना मुझे

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

0 likes

लिखित में हमारी गवाही लगेगी लिखा है 'लहू की सियाही लगेगी' किसी की ग़रज़ हो तो आ कर बचा ले वगरना नदामत तबाही लगेगी

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Nikhil Tiwari 'Nazeel'.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Nikhil Tiwari 'Nazeel''s sher.