गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न गए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी
Jaun Elia
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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ये झाँक लेती है दिल से जो दूसरे दिल में मेरी निगाह में सारा कमाल दर्द का है
Farhat Abbas Shah
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बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत' तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
Farhat Abbas Shah
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है किसी जालिम उदू की घात दरवाज़े में है या मसाफ़त है नई या रात दरवाज़े में है जिस तरहा उठती है नजरें बे-इरादा बार-बार साफ़ लगता है के कोई बात दरवाज़े में
Farhat Abbas Shah
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हर रोज़ उठाता हूँ किसी ख़्वाब की मय्यत और आप ये कहते हैं कि मातम न करूँँ मैं इक शख़्स दिखा दो मुझे हँसता हुआ दिल से गोया कि ये सब देख के भी ग़म न करूँँ मैं
Farhat Abbas Shah
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ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम है कई दिनों से कोई आस पास भी कम है हमें भी यूँ ही गुजरना पसंद है और फिर तुम्हारा शहर मुसाफ़िर-शनास भी कम है
Farhat Abbas Shah
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