ये झाँक लेती है दिल से जो दूसरे दिल में मेरी निगाह में सारा कमाल दर्द का है
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Farhat Abbas Shah
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sherKuch Alfaaz
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हर रोज़ उठाता हूँ किसी ख़्वाब की मय्यत और आप ये कहते हैं कि मातम न करूँँ मैं
sherKuch Alfaaz
है किसी जालिम उदू की घात दरवाज़े में है या मसाफ़त है नई या रात दरवाज़े में है
sherKuch Alfaaz
मैं बे-ख़याल कभी धूप में निकल आऊँ तो कुछ सहाब मिरे साथ साथ चलते हैं
sherKuch Alfaaz
बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत' तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से
sherKuch Alfaaz
उस के बारे में बहुत सोचता हूँ मुझ से बिछड़ा तो किधर जाएगा
sherKuch Alfaaz
बेकार ख़यालों से लिपट कर नहीं देखा जो कुछ भी हुआ हम ने पलटकर नहीं देखा
sherKuch Alfaaz
उसे ज़ियादा ज़रूरत थी घर बसाने की वो आ के मेरे दर-ओ-बाम ले गया मुझ से
sherKuch Alfaaz
दर्द सहने का अलग अंदाज़ है जी रहे हैं हम अदा की ज़िंदगी
sherKuch Alfaaz
ये दिल मलूल भी कम है उदास भी कम है कई दिनों से कोई आस पास भी कम है
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