लो हमारा जवाब ले जाओ ये महकता गुलाब ले जाओ
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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता
Tehzeeb Hafi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर सच कहो मजबूरी है क्या मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या
Zubair Ali Tabish
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
Meer Taqi Meer
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गुलाब चाँदनी-रातों पे वार आए हम तुम्हारे होंटों का सदक़ा उतार आए हम
Azhar Iqbal
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