जिन के मज़बूत इरादे बने पहचान उन की मंज़िलें आप ही हो जाती हैं आसान उन की
sherKuch Alfaaz
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जिन के होंटों पे हँसी पाँव में छाले होंगे हाँ वही लोग तुम्हें चाहने वाले होंगे
Parwaz Jalandhari
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तिरंगा शान है मेरी तिरंगा जान है मेरी तिरंगा सब सेे ऊँचा हो यही पहचान है मेरी
Aves Sayyad
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दिल्ली में आज भीक भी मिलती नहीं उन्हें था कल तलक दिमाग़ जिन्हें ताज-ओ-तख़्त का
Meer Taqi Meer
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तुझे कुछ याद भी है क्या मिरा उस रात में आना छतों से कूदकर के फिर भरी बरसात में आना कई मंज़र बने ख़ंजर चुभे मेरी निगाहों में मुझे मिलने को पर तेरा किसी के साथ में आना
nakul kumar
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ज़िंदगी हम ने तुझे दूर से पहचाना है तू किसी रिन्द का उजड़ा हुआ मैख़ाना है
Jaani Lakhnavi
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