माँ की गाली देकर हिट हो जाते हैं इस कलयुग में कौआ मोती खाता है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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याद उसी को करते रहना जिस का आना मुश्किल हो प्यार उसी से करते रहना जिस का मिलना ना-मुमकिन
Sanskar Shrivastav
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वो आया जीवन में मेरे जब मैं बिल्कुल तन्हा था उस के आने से भी लेकिन तन्हा तन्हा रहता हूँ
Sanskar Shrivastav
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वो दयालु हैं हमें अमृत ही देंगे भाग में विष हमारे भाग में होगा तो शिव पी जाएँगे
Sanskar Shrivastav
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सब दिया माँ भारती ने आप को आप बस इतना करें सर को झुकाएँ
Sanskar Shrivastav
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प्यार अगर केशव से हो तो सदियों तक ज़िंदा रहता है
Sanskar Shrivastav
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