माल-ओ-ज़र पर है इतना गुमाँ किस लिए कितने ही नामवर ख़ाक में मिल गए
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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उस का उत्तर सभी को दूँगा मैं सामने जो सवाल आएगा
Kumar Aryan
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सोचना ही बंद कर दो क्या कहेगा ये ज़माना
Kumar Aryan
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ज़िन्दगी तेरी कहानी में मुझे रोज़ जीना रोज़ मरना पड़ता है
Kumar Aryan
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मीर तख़ल्लुस रख लेने से मीर कोई हो जाएगा क्या
Kumar Aryan
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तुझ से बिछड़ के किसलिए मैं चश्म-ए-नम रहूँ बेशक गया है तू प तेरी याद तो नहीं
Kumar Aryan
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