तुझ से बिछड़ के किसलिए मैं चश्म-ए-नम रहूँ बेशक गया है तू प तेरी याद तो नहीं
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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टूट कर मैं किसी को चाहूँगा और फिर टूट कर मर जाऊँगा
Kumar Aryan
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रोटियाँ वक़्त पे जुटाने को जान आफ़त में डाल लीं हम ने
Kumar Aryan
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मैं खड़ा आज भी हूँ राह-गुज़र पर उन की छोड़ के चल भी दिए छोड़ के जाने वाले
Kumar Aryan
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मैं ख़ुद अपना दुश्मन हूँ बाक़ी सब सेे यारी है
Kumar Aryan
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मेरे सर इल्ज़ाम सारा जाएगा फिर कोई मासूम मारा जाएगा
Kumar Aryan
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