माँगे तो अगर जान भी हँस के तुझे दे दें तेरी तो कोई बात भी टाली नहीं जाती
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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तेरे गले में जो बाँहों को डाल रखते हैं तुझे मनाने का कैसा कमाल रखते हैं
Wasi Shah
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तुम मिरी आँख के तेवर न भुला पाओगे अन-कही बात को समझोगे तो याद आऊँगा
Wasi Shah
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हम जान से जाएँगे तभी बात बनेगी तुम से तो कोई राह निकाली नहीं जाती
Wasi Shah
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न तुम्हें होश रहे और न मुझे होश रहे इस क़दर टूट के चाहो मुझे पागल कर दो
Wasi Shah
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हर एक शख़्स चलेगा हमारी राहों पर मोहब्बतों में हमें वो मिसाल होना है
Wasi Shah
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