महीनों तक रहा करते थे सब मेहमान आँखों में, मगर अब ख़्वाब भी आते नहीं वीरान आँखों में ज़मान ए हिज्र कहने को रिवाज़ ए इश्क़ ही तो है, मगर क्या क्या नहीं होता है इस दौरान आँखों में
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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इश्क़ में धोखा खाने वाले बिल्कुल भी मायूस न हो इस रस्ते में थोड़ा आगे मयख़ाना भी आता है
Darpan
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घर आते आते सौदागर हो जाऊँ इतना भी बाज़ार नहीं देखूंगा मैं
Darpan
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ज़ब्त करो गर ग़म के बादल छाए हैं, रक़्स करो के बारिश आने वाली है
Darpan
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एक तितली से वा'दा है सो गुलशन में, ग़लती से भी ख़ार नहीं देखूँगा मैं (ख़ार- काँटे )
Darpan
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ग़ज़ल बनी है ज़िन्दगी, नफ़स नफ़स है शा'इरी, सुख़न से मेरी आशिक़ी , ग़ज़ब है बेमिसाल है
Darpan
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