मैं हुनर-मंद की फौज से आ गया बाहर मैं अकल-मंद होता मगर आ गया बाहर
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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वो नादाँ भी हैं बे-दाग़ भी हैं वो लीडर होना कोई सीख रहा है
FARHAN ASHRAF
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याद रखना आप को जैसे मुस्कुराना और मर जाना
FARHAN ASHRAF
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कैसा बचपन था, कैसी थी दादीजी भी बातें बचपन की सब कुछ बताती है वो
FARHAN ASHRAF
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मेरे दोस्त कम है जो भी हैं अहम हैं ग़म हो या ख़ुशी हो सब में हम बहम है
FARHAN ASHRAF
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आदतन मैं तो ख़ामोश हो जाता हूँ अपनी जब भी कहानी सुनाती है वो
FARHAN ASHRAF
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