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मैं और बस मेरी तन्हाई हम दोनों प्यार मोहब्बत और जुदाई हम दोनों

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उन की आँखें में बेईमानी है उन के लहज़े में बद-गुमानी है अब मोहब्बत कहाँ है रिश्ते में उन की बातों में मेहरबानी है

Yogendra Singh Raghuwanshi

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तेरी अपनी क़िस्मत है और मेरी अपनी किस्मत है तुझ को तो संसार मिला पर मुझ को तू भी न मिल पाया

Yogendra Singh Raghuwanshi

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दर्द में जान जा रही होगी आँसुओं में नहा रही होगी हो के मजबूर इस ज़माने से वो मेरे ख़त जला रही होगी

Yogendra Singh Raghuwanshi

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तेरे हाथों में कंगन बना झूम लूँ तेरी नज़रों में सारा जहाँ घूम लूँ प्रेम में तेरे अधरों को क्या चूमना तेरे मेहँदी लगे कर कमल चूम लूँ

Yogendra Singh Raghuwanshi

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दर्द दिल में दबा लिया होगा ग़म से वा'दा निभा लिया होगा क़ब्र पर आके मेरे क़ातिल ने अपना चेहरा छुपा लिया होगा

Yogendra Singh Raghuwanshi

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