दर्द में जान जा रही होगी आँसुओं में नहा रही होगी हो के मजबूर इस ज़माने से वो मेरे ख़त जला रही होगी
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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उन की आँखें में बेईमानी है उन के लहज़े में बद-गुमानी है अब मोहब्बत कहाँ है रिश्ते में उन की बातों में मेहरबानी है
Yogendra Singh Raghuwanshi
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दर्द दिल में दबा लिया होगा ग़म से वा'दा निभा लिया होगा क़ब्र पर आके मेरे क़ातिल ने अपना चेहरा छुपा लिया होगा
Yogendra Singh Raghuwanshi
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तुम मेरे दिल में और मैं बस तुम में गुम अक्सर छत पर साथ टहलते हैं हम तुम
Yogendra Singh Raghuwanshi
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मैं और बस मेरी तन्हाई हम दोनों प्यार मोहब्बत और जुदाई हम दोनों
Yogendra Singh Raghuwanshi
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तुझ सेे रिश्ता क़ायम रखने को जानाँ जाने कितनी बार गिराया है ख़ुद को
Yogendra Singh Raghuwanshi
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