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तुझ सेे रिश्ता क़ायम रखने को जानाँ जाने कितनी बार गिराया है ख़ुद को

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दर्द दिल में दबा लिया होगा ग़म से वा'दा निभा लिया होगा क़ब्र पर आके मेरे क़ातिल ने अपना चेहरा छुपा लिया होगा

Yogendra Singh Raghuwanshi

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उन की आँखें में बेईमानी है उन के लहज़े में बद-गुमानी है अब मोहब्बत कहाँ है रिश्ते में उन की बातों में मेहरबानी है

Yogendra Singh Raghuwanshi

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तेरी अपनी क़िस्मत है और मेरी अपनी किस्मत है तुझ को तो संसार मिला पर मुझ को तू भी न मिल पाया

Yogendra Singh Raghuwanshi

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दर्द में जान जा रही होगी आँसुओं में नहा रही होगी हो के मजबूर इस ज़माने से वो मेरे ख़त जला रही होगी

Yogendra Singh Raghuwanshi

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होंठों पर इक बात छुपाकर रक्खी है प्रिया नेह बरसात छुपाकर रक्खी है जिस रैना में स्वप्न मिलन के देखे थे वो काजल सी रात छुपाकर रक्खी है

Yogendra Singh Raghuwanshi

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