होंठों पर इक बात छुपाकर रक्खी है प्रिया नेह बरसात छुपाकर रक्खी है जिस रैना में स्वप्न मिलन के देखे थे वो काजल सी रात छुपाकर रक्खी है
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वगैरा करती है बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है रोने में आसानी पैदा करती है
Tehzeeb Hafi
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
Anand Raj Singh
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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
Gyan Prakash Akul
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दर्द में जान जा रही होगी आँसुओं में नहा रही होगी हो के मजबूर इस ज़माने से वो मेरे ख़त जला रही होगी
Yogendra Singh Raghuwanshi
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तुझ सेे रिश्ता क़ायम रखने को जानाँ जाने कितनी बार गिराया है ख़ुद को
Yogendra Singh Raghuwanshi
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तुम मेरे दिल में और मैं बस तुम में गुम अक्सर छत पर साथ टहलते हैं हम तुम
Yogendra Singh Raghuwanshi
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उन की आँखें में बेईमानी है उन के लहज़े में बद-गुमानी है अब मोहब्बत कहाँ है रिश्ते में उन की बातों में मेहरबानी है
Yogendra Singh Raghuwanshi
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तेरी अपनी क़िस्मत है और मेरी अपनी किस्मत है तुझ को तो संसार मिला पर मुझ को तू भी न मिल पाया
Yogendra Singh Raghuwanshi
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