मैं भी अपनी माँ के जैसे अपनी बेटी को चाहूँ मैं ने रब से चाहा भी यही है कि मुझे इक बेटी हो
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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ज़ीस्त की थी जुस्तुजू अब भला हम क्या करें मौत का व्यापार था अब जिएँ या हम मरें सम्त सारी हैं कड़ी मुश्किलें 'सलमा' बड़ी मौत है अब आरज़ू ज़ीस्त का फिर क्या करें
Salma Malik
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तुम लड़के तो इश्क़ में पागल भी हो सकते हों हम लड़की तो इतनी ख़ुश-क़िस्मत भी नईं होती
Salma Malik
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कहते हैं इस में हार भी हो जाए तो हार नहीं होती सो इश्क़ की बाज़ी 'सलमा' हम भी इक दिन खेल के देखेंगे
Salma Malik
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यही वो वक़्त है जो आज हम बर्बाद करते हैं यही वो वक़्त है जो लौट कर वापस नहीं आता
Salma Malik
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ये ज़िन्दगी जीने को बस ज़िंदादिली सलमा ज़रूरी है ये बे-दिली तो आदमी को बे-दिली से मार देती है
Salma Malik
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