ये ज़िन्दगी जीने को बस ज़िंदादिली सलमा ज़रूरी है ये बे-दिली तो आदमी को बे-दिली से मार देती है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसी के चेहरे पे आँखें हमारी रह जाएँ किसी को इतना भी क्या देखना ज़रूरी है
Jyoti Azad Khatri
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ज़िक्र तुम्हारा बहुत ज़रूरी इन ग़ज़लों में जानेमन चाय बिना अदरक को डाले अच्छी थोड़ी बनती है
Tanoj Dadhich
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सारे ग़म भूल गए आप के रोने पे मुझे किस को ठंडक में पसीने का ख़याल आता है आखरी उम्र में जाते है मदीने हम लोग मरने लगते है तो जीने का ख़याल आता है
Nadir Ariz
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तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा इंसान की औलाद है इंसान बनेगा
Sahir Ludhianvi
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ज़ीस्त की थी जुस्तुजू अब भला हम क्या करें मौत का व्यापार था अब जिएँ या हम मरें सम्त सारी हैं कड़ी मुश्किलें 'सलमा' बड़ी मौत है अब आरज़ू ज़ीस्त का फिर क्या करें
Salma Malik
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यही वो वक़्त है जो आज हम बर्बाद करते हैं यही वो वक़्त है जो लौट कर वापस नहीं आता
Salma Malik
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मैं भी अपनी माँ के जैसे अपनी बेटी को चाहूँ मैं ने रब से चाहा भी यही है कि मुझे इक बेटी हो
Salma Malik
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तुम लड़के तो इश्क़ में पागल भी हो सकते हों हम लड़की तो इतनी ख़ुश-क़िस्मत भी नईं होती
Salma Malik
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ख़ुदा ने भी क्या ख़ूब ही ये ख़ुदाई बनाई, उठा कर इसी ख़ाक से ख़ाक में ही मिलाई
Salma Malik
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