मैं हर शख़्स के चेहरे को बस इस उम्मीद से तकता हूँ शायद से मुझ को दो आँखें तेरे जैसी दिख जाएँ
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
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तू बुझा कर रख गया था जबसे इस दिल के चराग़ हम ने इस घर में नहीं की रौशनाई आज तक
Siddharth Saaz
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तू तो वाक़िफ़ है रिवाज़-ए-ग़म से इस के इश्क़ तो तेरा भी ये पहला नहीं है
Siddharth Saaz
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अब नहीं हैं लोग जो दुनिया थे पहले और ये दुनिया भी अब दुनिया नहीं है
Siddharth Saaz
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ये जानते हैं ठीक नहीं माँग रहे हैं हम एक खंडहर को मकीं माँग रहे हैं सब माँग रहे हैं ख़ुदा से तेरा जिस्म और हम हैं, कि फ़क़त तेरी जबीं माँग रहे हैं
Siddharth Saaz
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