sherKuch Alfaaz

main ek shajar ki tarah rah-guzar mein thahra hun thakan utar ke tu kis taraf rawana hua

More from Naseer Turabi

ऐ मेरी ज़िंदगी ऐ मेरी हम-नवा तू कहाँ रह गई मैं कहाँ आ गया कुछ न अपनी ख़बर कुछ न तेरा पता तू कहाँ रह गया मैं कहाँ आ गया सब्ज़ शाख़ों से गुल यूँँही चुनना कभी गुल से गुलज़ार के ख़्वाब बुनना कभी फ़ुर्सत-ए-इब्तिदा हसरत-ए-इंतिहा तू कहाँ रह गई मैं कहाँ आ गया

Naseer Turabi

8 likes

हर शाम इक मलाल की आदत सी हो गई मिलने का इंतिज़ार भी मिलना सा हो गया

Naseer Turabi

21 likes

ये हवा सारे चराग़ों को उड़ा ले जाएगी रात ढलने तक यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा

Naseer Turabi

34 likes

अदावतें थीं तग़ाफ़ुल था रंजिशें थीं बहुत बिछड़ने वाले में सब कुछ था बे-वफ़ाई न थी

Naseer Turabi

36 likes

मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता

Naseer Turabi

74 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Naseer Turabi.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Naseer Turabi's sher.