ऐ मेरी ज़िंदगी ऐ मेरी हम-नवा तू कहाँ रह गई मैं कहाँ आ गया कुछ न अपनी ख़बर कुछ न तेरा पता तू कहाँ रह गया मैं कहाँ आ गया

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Naseer Turabi
@naseer-turabi
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
हर शाम इक मलाल की आदत सी हो गई मिलने का इंतिज़ार भी मिलना सा हो गया
sherKuch Alfaaz
हम-रही की बात मत कर इम्तिहाँ हो जाएगा हम सुबुक हो जाएँगे तुझ को गिराँ हो जाएगा
sherKuch Alfaaz
ये हवा सारे चराग़ों को उड़ा ले जाएगी रात ढलने तक यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा
sherKuch Alfaaz
अदावतें थीं तग़ाफ़ुल था रंजिशें थीं बहुत बिछड़ने वाले में सब कुछ था बे-वफ़ाई न थी
sherKuch Alfaaz
मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता
sherKuch Alfaaz
वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
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