मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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सहरा से हो के बाग़ में आया हूँ सैर को हाथों में फूल हैं मेरे पाँव में रेत है
Tehzeeb Hafi
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तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ समुंदरों से अकेले में बात करनी है
Tehzeeb Hafi
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इक तेरा हिज्र दाइमी है मुझे वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे
Tehzeeb Hafi
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मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ वो मेरे साथ बसर रात क्यूँँ नहीं करता
Tehzeeb Hafi
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इस लिए रौशनी में ठंडक है कुछ चराग़ों को नम किया गया है
Tehzeeb Hafi
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