मैं लुटाया इतना ख़ुद को अब बुरा लगता नहीं जाने कोई शख़्स मुझ को क्यूँँ मिरा लगता नहीं
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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ये मत पूछो कि उस में और क्या-क्या देखता हूँ उसी इक शख़्स में मैं अपनी दुनिया देखता हूँ कभी आँखें कभी चेहरा कभी लब तो कभी तिल कि दिल भरता नहीं मैं उस को जितना देखता हूँ
Shubham Vaishnav
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ये मुहब्बत दाख़िले के वक़्त आसाँ लगती है पर मुहब्बत में शुरू फिर इम्तिहाँ हो जाते हैं
Shubham Vaishnav
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सभी की नज़र ही उधर है उसे भी नहीं ये ख़बर है अभी तो मिला है मुझे वो उसी पर सभी की नज़र है
Shubham Vaishnav
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फिर शुरू तर्क-ए-त'अल्लुक़ की कहानी मत करो बात ये है बात अब कुछ भी पुरानी मत करो
Shubham Vaishnav
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अब तो अच्छी चल रही है ज़िंदगी थोड़ी बहुत हम को भी आने लगी है शा'इरी थोड़ी बहुत
Shubham Vaishnav
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