सभी की नज़र ही उधर है उसे भी नहीं ये ख़बर है अभी तो मिला है मुझे वो उसी पर सभी की नज़र है
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये मत पूछो कि उस में और क्या-क्या देखता हूँ उसी इक शख़्स में मैं अपनी दुनिया देखता हूँ कभी आँखें कभी चेहरा कभी लब तो कभी तिल कि दिल भरता नहीं मैं उस को जितना देखता हूँ
Shubham Vaishnav
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फिर शुरू तर्क-ए-त'अल्लुक़ की कहानी मत करो बात ये है बात अब कुछ भी पुरानी मत करो
Shubham Vaishnav
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ये मुहब्बत दाख़िले के वक़्त आसाँ लगती है पर मुहब्बत में शुरू फिर इम्तिहाँ हो जाते हैं
Shubham Vaishnav
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साल हर साल जैसे गुज़र ही गया कोई दिल में रहा फिर उतर ही गया लग गया इक कैलेंडर नया साल पर इक बरस का कैलेंडर उतर ही गया
Shubham Vaishnav
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मैं उसे फिर कभी भी पुकारा नहीं ग़लतियाँ जो हुई अब दुबारा नहीं मैं किताबों भरी ज़िंदगी में यहाँ और अब दूसरा भी सहारा नहीं
Shubham Vaishnav
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