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सभी की नज़र ही उधर है उसे भी नहीं ये ख़बर है अभी तो मिला है मुझे वो उसी पर सभी की नज़र है

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ये मत पूछो कि उस में और क्या-क्या देखता हूँ उसी इक शख़्स में मैं अपनी दुनिया देखता हूँ कभी आँखें कभी चेहरा कभी लब तो कभी तिल कि दिल भरता नहीं मैं उस को जितना देखता हूँ

Shubham Vaishnav

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फिर शुरू तर्क-ए-त'अल्लुक़ की कहानी मत करो बात ये है बात अब कुछ भी पुरानी मत करो

Shubham Vaishnav

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ये मुहब्बत दाख़िले के वक़्त आसाँ लगती है पर मुहब्बत में शुरू फिर इम्तिहाँ हो जाते हैं

Shubham Vaishnav

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साल हर साल जैसे गुज़र ही गया कोई दिल में रहा फिर उतर ही गया लग गया इक कैलेंडर नया साल पर इक बरस का कैलेंडर उतर ही गया

Shubham Vaishnav

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मैं उसे फिर कभी भी पुकारा नहीं ग़लतियाँ जो हुई अब दुबारा नहीं मैं किताबों भरी ज़िंदगी में यहाँ और अब दूसरा भी सहारा नहीं

Shubham Vaishnav

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