मैं तो शाइ'र हूँ सो मैं जगता रहा इक ग़ज़ल मुझ सेे लिपट कर सो गई
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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यूँँ तो अम्मी हैं मेरी ढूँढ़ के तुम को लाईं तुम अगर यूँँ भी कहीं मिलती पसंद आ जाती
Amaan Javed
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गाल आगे कर इंतिज़ार न कर मेरे रंगों को बे-क़रार न कर
Amaan Javed
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जिस चीज़ को छुआ उधर गुलाब खिल गए उन के क़दम गए जिधर गुलाब खिल गए
Amaan Javed
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हुस्न की तौहीन कर दी वक़्त की बर्बादी की तेरे ठुकराए हुओ ने किस सेे किस सेे शादी की
Amaan Javed
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कोई तो है जो मेरे कान में ये कह गया है तू अपनी राह में दीवार बन के रह गया है
Amaan Javed
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