यूँँ तो अम्मी हैं मेरी ढूँढ़ के तुम को लाईं तुम अगर यूँँ भी कहीं मिलती पसंद आ जाती
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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मैं तो शाइ'र हूँ सो मैं जगता रहा इक ग़ज़ल मुझ सेे लिपट कर सो गई
Amaan Javed
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गाल आगे कर इंतिज़ार न कर मेरे रंगों को बे-क़रार न कर
Amaan Javed
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आती है बैठे बैठे तेरी याद इस तरह आता है जैसे याद बुज़ुर्गों को लखनऊ
Amaan Javed
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अब मुझे फ़ारिग़ करो तुम अपनी यादों से कोई आया है मेरा बनने मेरे घर में
Amaan Javed
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हुस्न की तौहीन कर दी वक़्त की बर्बादी की तेरे ठुकराए हुओ ने किस सेे किस सेे शादी की
Amaan Javed
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