आती है बैठे बैठे तेरी याद इस तरह आता है जैसे याद बुज़ुर्गों को लखनऊ
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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मैं तो शाइ'र हूँ सो मैं जगता रहा इक ग़ज़ल मुझ सेे लिपट कर सो गई
Amaan Javed
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कोई तो है जो मेरे कान में ये कह गया है तू अपनी राह में दीवार बन के रह गया है
Amaan Javed
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यूँँ तो अम्मी हैं मेरी ढूँढ़ के तुम को लाईं तुम अगर यूँँ भी कहीं मिलती पसंद आ जाती
Amaan Javed
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हुस्न की तौहीन कर दी वक़्त की बर्बादी की तेरे ठुकराए हुओ ने किस सेे किस सेे शादी की
Amaan Javed
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मुझे लगता है मेरी ज़िंदगी मैं जी रहा हूँ किसी धुन पर जो क़ुदरत से सुनाई दे रही है
Amaan Javed
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