मैं ने बस एक बोसा चाहा था उस से वो शख़्स आया मगर मेरी क़ज़ा के बा'द
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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नाज़ तू ने सब उठाए मेरे ख़ातिर काश करता कुछ मैं भी जाँ तेरे ख़ातिर उम्र भर मरता रहा इक बूँद पर मैं और समुंदर भी था प्यासा मेरे ख़ातिर
Brajnabh Pandey
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वो तेरे ख़ातिर जो सपना देखा था 'ब्रज' अब वो कोई और पूरा कर रहा है
Brajnabh Pandey
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तुझ को मुहब्बत रास आने से रही ब्रज इस मुहब्बत में तू मारा जाएगा
Brajnabh Pandey
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है मुझे तेरे बदन की चाह कुछ इस तरह जाना मौत ही को चाहता हो इक मरीज़ ए इश्क़ जैसे
Brajnabh Pandey
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फिर वही शाम याद आई है आज फिर रात तन्हा गुज़रेगी
Brajnabh Pandey
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