sherKuch Alfaaz

मैं ने सफ़ेद-पोशों में ढूँढा बहुत मगर ईमान का मुझे तो निशां तक नहीं दिखा

More from Nityanand Vajpayee

ये भरम मेरा बना रहने भी दो मेरे सीने को तना रहने भी दो मानता हूँ मैं कि आओगी न तुम फोटो देने से मना रहने भी दो

Nityanand Vajpayee

5 likes

मुनासिब हो कि तुम मिल जाओ मुझ को वगरना मैं जहाँ को ख़ाक कर दूँगा

Nityanand Vajpayee

3 likes

उल्फ़त की बात है तो सलीक़े से कीजिए सड़कों पे फब्तियाँ तो लफंगों का काम है

Nityanand Vajpayee

5 likes

कह सका हूँ चंद ही दमदार शे'र ज़्यादातर होकर गए बीमार शे'र कहते कहते जब हुआ बीमार मैं तब कहीं जा कर हुए दो-चार शे'र

Nityanand Vajpayee

6 likes

उन की यादों का निशिदिन अभिनंदन करते रहते हैं रात गुज़रने की ख़ातिर हम क्रंदन करते रहते हैं विक्षिप्तों के जैसी स्थिति में हैं हम अब क्या बतलाएँ निश्छल प्रेमिल मन से प्रिय का वंदन करते रहते हैं

Nityanand Vajpayee

5 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Nityanand Vajpayee.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Nityanand Vajpayee's sher.