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उल्फ़त की बात है तो सलीक़े से कीजिए सड़कों पे फब्तियाँ तो लफंगों का काम है

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मुनासिब हो कि तुम मिल जाओ मुझ को वगरना मैं जहाँ को ख़ाक कर दूँगा

Nityanand Vajpayee

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ये भरम मेरा बना रहने भी दो मेरे सीने को तना रहने भी दो मानता हूँ मैं कि आओगी न तुम फोटो देने से मना रहने भी दो

Nityanand Vajpayee

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मैं ने सफ़ेद-पोशों में ढूँढा बहुत मगर ईमान का मुझे तो निशां तक नहीं दिखा

Nityanand Vajpayee

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उन की यादों का निशिदिन अभिनंदन करते रहते हैं रात गुज़रने की ख़ातिर हम क्रंदन करते रहते हैं विक्षिप्तों के जैसी स्थिति में हैं हम अब क्या बतलाएँ निश्छल प्रेमिल मन से प्रिय का वंदन करते रहते हैं

Nityanand Vajpayee

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प्रेम को हम कृष्ण के जैसे समझ पाते तो फिर मर्त्य जग की भीड़ से ये दिल छुड़ा लाते तो फिर खिल गए होते कहीं पथ के प्रसूनों की तरह बाँसुरी की धुन सुना अह्यलाद बरसाते तो फिर

Nityanand Vajpayee

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