उल्फ़त की बात है तो सलीक़े से कीजिए सड़कों पे फब्तियाँ तो लफंगों का काम है
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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मुनासिब हो कि तुम मिल जाओ मुझ को वगरना मैं जहाँ को ख़ाक कर दूँगा
Nityanand Vajpayee
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ये भरम मेरा बना रहने भी दो मेरे सीने को तना रहने भी दो मानता हूँ मैं कि आओगी न तुम फोटो देने से मना रहने भी दो
Nityanand Vajpayee
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मैं ने सफ़ेद-पोशों में ढूँढा बहुत मगर ईमान का मुझे तो निशां तक नहीं दिखा
Nityanand Vajpayee
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उन की यादों का निशिदिन अभिनंदन करते रहते हैं रात गुज़रने की ख़ातिर हम क्रंदन करते रहते हैं विक्षिप्तों के जैसी स्थिति में हैं हम अब क्या बतलाएँ निश्छल प्रेमिल मन से प्रिय का वंदन करते रहते हैं
Nityanand Vajpayee
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प्रेम को हम कृष्ण के जैसे समझ पाते तो फिर मर्त्य जग की भीड़ से ये दिल छुड़ा लाते तो फिर खिल गए होते कहीं पथ के प्रसूनों की तरह बाँसुरी की धुन सुना अह्यलाद बरसाते तो फिर
Nityanand Vajpayee
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