प्रेम को हम कृष्ण के जैसे समझ पाते तो फिर मर्त्य जग की भीड़ से ये दिल छुड़ा लाते तो फिर खिल गए होते कहीं पथ के प्रसूनों की तरह बाँसुरी की धुन सुना अह्यलाद बरसाते तो फिर
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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तू मिला ही नहीं मगर फिर भी है बिछड़ने का मुझ को डर फिर भी जानता हूँ तू आ नहीं सकता पर सजाया है मैं ने घर फिर भी
Sandeep Thakur
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मुनासिब हो कि तुम मिल जाओ मुझ को वगरना मैं जहाँ को ख़ाक कर दूँगा
Nityanand Vajpayee
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मैं ने सफ़ेद-पोशों में ढूँढा बहुत मगर ईमान का मुझे तो निशां तक नहीं दिखा
Nityanand Vajpayee
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ये भरम मेरा बना रहने भी दो मेरे सीने को तना रहने भी दो मानता हूँ मैं कि आओगी न तुम फोटो देने से मना रहने भी दो
Nityanand Vajpayee
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उन की यादों का निशिदिन अभिनंदन करते रहते हैं रात गुज़रने की ख़ातिर हम क्रंदन करते रहते हैं विक्षिप्तों के जैसी स्थिति में हैं हम अब क्या बतलाएँ निश्छल प्रेमिल मन से प्रिय का वंदन करते रहते हैं
Nityanand Vajpayee
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उल्फ़त की बात है तो सलीक़े से कीजिए सड़कों पे फब्तियाँ तो लफंगों का काम है
Nityanand Vajpayee
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