sherKuch Alfaaz

प्रेम को हम कृष्ण के जैसे समझ पाते तो फिर मर्त्य जग की भीड़ से ये दिल छुड़ा लाते तो फिर खिल गए होते कहीं पथ के प्रसूनों की तरह बाँसुरी की धुन सुना अह्यलाद बरसाते तो फिर

Related Sher

नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी

Jaun Elia

183 likes

बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी

Ankita Singh

211 likes

कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

Jawwad Sheikh

163 likes

इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे

Bashir Badr

112 likes

तू मिला ही नहीं मगर फिर भी है बिछड़ने का मुझ को डर फिर भी जानता हूँ तू आ नहीं सकता पर सजाया है मैं ने घर फिर भी

Sandeep Thakur

90 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Nityanand Vajpayee.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Nityanand Vajpayee's sher.