मनाने को शहंशाह तो कभी शाह कह रही हो जो मेरी जाँ तुम मुझे इक बार अपना क्यूँ नहीं कहती
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है
Waseem Barelvi
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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तैरने की कश्मकश में डूबते देखा है सब को डूबने वाले को सचमुच तैरना आता है लेकिन
Aatish Alok
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माँग नहीं भर पाया उस की दो आँखों को भर आया हूँ
Aatish Alok
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मैं ख़ूब ख़ुश रहूँगा तेरे बोसे से मगर, मुझे है तुम सेे पूछना कि ख़ुश रहोगे तुम
Aatish Alok
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छोड़ जाने का बहाना चाहिए था तो मुझे पहले बताना चाहिए था कैसे हँसते हो भला उस बात पर तुम जिस में तुम को डूब जाना चाहिए था
Aatish Alok
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हिज्र मेरा देख लो और फिर कभी कहना नहीं बेवफ़ाई कुछ नहीं है बे-वफ़ा कुछ भी नहीं
Aatish Alok
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