मन्ज़र कोई नहीं है नहीं रंग-ओ-बू मगर शादाब मेरा नाम है अफ़सोस कीजिए
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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वो बहुत ही महान है भाई ये फ़क़त इक गुमान है भाई
Shadab Shabbiri
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वो भी बहुत अजीब है हम भी अजीब हैं या'नी कि दोनों मिल के अजीब-ओ-ग़रीब हैं
Shadab Shabbiri
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तेरी आँखों में डूब कर इक दिन जी में आता है ख़ुद-कुशी कर लूँ
Shadab Shabbiri
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तिरा दीदार हो जाता मगर अफ़सोस है इस पर कभी कुछ काम ले डूबा कभी आराम ले डूबा
Shadab Shabbiri
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नाख़ुदा को ख़ुदा समझते हो क्या कोई नाख़ुदा, ख़ुदा सा है
Shadab Shabbiri
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