वो भी बहुत अजीब है हम भी अजीब हैं या'नी कि दोनों मिल के अजीब-ओ-ग़रीब हैं
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ज़माना तो उठाना चाहता है मैं पैर अपने जमाना चाहता हूँ
Shadab Shabbiri
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यूँँ तो कोई भी बे-लिबास न था फिर भी लगता था बे-लिबासी थी उस से मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे और फिर देर तक उदासी थी
Shadab Shabbiri
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तेरी आँखों में डूब कर इक दिन जी में आता है ख़ुद-कुशी कर लूँ
Shadab Shabbiri
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थी किताबी किताब में गुज़री ज़िन्दगी सारी ख़्वाब में गुज़री उस के दरबार से रहा रिश्ता उम्र बस जी जनाब में गुज़री
Shadab Shabbiri
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कभी लगते गले से वो कभी सरगोशियांँ करते कभी नज़रें झुकाते और शरमाते तो अच्छा था
Shadab Shabbiri
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