नाख़ुदा को ख़ुदा समझते हो क्या कोई नाख़ुदा, ख़ुदा सा है
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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ज़माना तो उठाना चाहता है मैं पैर अपने जमाना चाहता हूँ
Shadab Shabbiri
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यूँँ तो कोई भी बे-लिबास न था फिर भी लगता था बे-लिबासी थी उस सेे मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे और फिर देर तक उदासी थी
Shadab Shabbiri
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यूँँ तो कोई भी बे-लिबास न था फिर भी लगता था बे-लिबासी थी उस से मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे और फिर देर तक उदासी थी
Shadab Shabbiri
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तुम्हें शादाब होना चाहिए था मगर तुम हो कि मुरझाए हुए हो
Shadab Shabbiri
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तिरा दीदार हो जाता मगर अफ़सोस है इस पर कभी कुछ काम ले डूबा कभी आराम ले डूबा
Shadab Shabbiri
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