मस्जिद के पास जबकि मकाँ उस का है मगर मैं हूँ कि अब तलक भी नमाज़ी न बन सका
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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तेरी क़समें तेरे वा'दे तेरी बाहें तेरी यादें सभी मिल कर बताते हैं तेरा किरदार झूठा है
Arman Habib
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वो लिखता जब ग़ज़ल है तो परी की बात करता है वो हर मिसरे में फिर उस की ख़ुशी की बात करता है
Arman Habib
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मियाँ मुझ को सवारी देखनी है पिया की मेहरबानी देखनी है अभी से आँख भीगी जा रही है अभी तो उस की शादी देखनी है
Arman Habib
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गुल की ये ज़र्द चादर ऐसे बिछा रखी है सारे ज़मीं को जैसे हल्दी लगा रखी है तितली का रक़्स फिर वो भँवरे की नर्म गुफ़्तन सरसों के खेत ने ये महफ़िल सजा रखी है
Arman Habib
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ग़ज़ल नहीं है ये अरमान सुन रहे हो तुम ये दर्द है जो मिरी रूह से निकलती है
Arman Habib
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