वो लिखता जब ग़ज़ल है तो परी की बात करता है वो हर मिसरे में फिर उस की ख़ुशी की बात करता है
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कोई चादर वफ़ा नहीं करती वक़्त जब खींच-तान करता है
Unknown
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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सुकूँ घाटों पे ऐसा है कि फ़ारस भूल जाऊँ मैं मगर मुमकिन नहीं है ये बनारस भूल जाऊँ मैं
Arman Habib
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तेरी क़समें तेरे वा'दे तेरी बाहें तेरी यादें सभी मिल कर बताते हैं तेरा किरदार झूठा है
Arman Habib
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रख दिए होंठ होंठों पे तुम ने देख लो अब शुगर बढ़ गया है
Arman Habib
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तिरी हर बात वादे की तिरा दावा भी खोटा है तेरा भेजा हुआ ख़त भी मुझे मालूम झूठा है मेरा हर लफ़्ज़ तेरा था मेरी हर साँस थी तेरी करूँँ क्या ज़िक्र तेरा मैं तेरी ख़ूँ में ही धोका है
Arman Habib
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अव्वल-अव्वल उस का हँसता चेहरा देखा जा सकता है इक ही लम्हे में फिर मौसम अच्छा देखा जा सकता है दिलकश चेहरा मय-कश आँखें बिखरी ज़ुल्फ़ों से तुम निकलो देखो तो फिर दो आँखों से दुनिया देखा जा सकता है
Arman Habib
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