सुकूँ घाटों पे ऐसा है कि फ़ारस भूल जाऊँ मैं मगर मुमकिन नहीं है ये बनारस भूल जाऊँ मैं
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी या'नी उन सेे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
Varun Anand
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अव्वल तो मैं नाराज़ नहीं होता हूँ लेकिन हो जाऊँ तो फिर मुझ सेा बुरा होता नहीं है
Ali Zaryoun
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वो लिखता जब ग़ज़ल है तो परी की बात करता है वो हर मिसरे में फिर उस की ख़ुशी की बात करता है
Arman Habib
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ये दुनिया चाहती है हर किसी से फ़ायदा अपना बिना मतलब किसी पर यूँ इनायत कौन करता है
Arman Habib
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ख़ुद से कर ली है दुश्मनी हम ने तोड़ कर के ये आशिक़ी हम ने हम ने सिगरेट तो नहीं फूँकी फूँक डाली ये ज़िन्दगी हम ने
Arman Habib
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मस्जिद के पास जबकि मकाँ उस का है मगर मैं हूँ कि अब तलक भी नमाज़ी न बन सका
Arman Habib
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ये जो ग़मगीन से चेहरे हैं यहाँ ये भी हँसते हुए चेहरे थे कभी
Arman Habib
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