ये जो ग़मगीन से चेहरे हैं यहाँ ये भी हँसते हुए चेहरे थे कभी
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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रख दिए होंठ होंठों पे तुम ने देख लो अब शुगर बढ़ गया है
Arman Habib
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ग़म मनाने मैं तिरे दर पे नहीं आऊँगा अपने अंदर ही कहीं चुपके से मर जाऊँगा
Arman Habib
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मैं पर्वत हूँ मगर मैं एक वादी छोड़ आया हूँ मुहब्बत में तिरे मैं शाह-ज़ादी छोड़ आया हूँ
Arman Habib
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दुल्हन की ख़ुशबू से सारा आँगन सजा रहेगा बाहर वो पत्थर सा कोई आशिक़ पड़ा रहेगा
Arman Habib
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हम अपनी छत पर इबादतों में जो सर झुकाएँ गुनाह कैसा हम अपने हक़ के लिए लड़ेंगे तिरी ये जुरअत नहीं चलेगी
Arman Habib
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