ग़म मनाने मैं तिरे दर पे नहीं आऊँगा अपने अंदर ही कहीं चुपके से मर जाऊँगा
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मैं पर्वत हूँ मगर मैं एक वादी छोड़ आया हूँ मुहब्बत में तिरे मैं शाह-ज़ादी छोड़ आया हूँ
Arman Habib
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ये जो ग़मगीन से चेहरे हैं यहाँ ये भी हँसते हुए चेहरे थे कभी
Arman Habib
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ग़रीबी चीख़ती फिरती है हर इक मोड़ पर लेकिन यहाँ हर कान बहरा है यहाँ हर दिल ही पत्थर है
Arman Habib
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ख़ुद से कर ली है दुश्मनी हम ने तोड़ कर के ये आशिक़ी हम ने हम ने सिगरेट तो नहीं फूँकी फूँक डाली ये ज़िन्दगी हम ने
Arman Habib
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ये दुनिया चाहती है हर किसी से फ़ायदा अपना बिना मतलब किसी पर यूँ इनायत कौन करता है
Arman Habib
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