गुल की ये ज़र्द चादर ऐसे बिछा रखी है सारे ज़मीं को जैसे हल्दी लगा रखी है तितली का रक़्स फिर वो भँवरे की नर्म गुफ़्तन सरसों के खेत ने ये महफ़िल सजा रखी है
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न गए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
Farhat Abbas Shah
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ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं
Khurram Afaq
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तेरी क़समें तेरे वा'दे तेरी बाहें तेरी यादें सभी मिल कर बताते हैं तेरा किरदार झूठा है
Arman Habib
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ये दुनिया चाहती है हर किसी से फ़ायदा अपना बिना मतलब किसी पर यूँ इनायत कौन करता है
Arman Habib
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मियाँ मुझ को सवारी देखनी है पिया की मेहरबानी देखनी है अभी से आँख भीगी जा रही है अभी तो उस की शादी देखनी है
Arman Habib
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ये जो ग़मगीन से चेहरे हैं यहाँ ये भी हँसते हुए चेहरे थे कभी
Arman Habib
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ज़िंदा हैं हम मगर ये लगन भी अजीब है मर कर भी अपने चाहने वालों से बोलते
Arman Habib
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