ये रख रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ख़ुद बुलाओ कि वो यूँँ घर से नहीं निकलेगा यहाँ इनआ'म मुक़द्दर से नहीं निकलेगा ऐसे मौसम में बिना काम के आया हुआ शख़्स इतनी जल्दी तेरे दफ़्तर से नहीं निकलेगा
Khurram Afaq
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नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे तुम्हारी मेज़बानी के बहाने कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
Khurram Afaq
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जो ज़रा ठीक से किरदार निगारी हो जाए ये कहानी तो हक़ीक़त पे भी तारी हो जाए तेरे हामी है सो उठ कर भी नहीं जा सकते जाने किस वक़्त यहाँ राय-शुमारी हो जाए
Khurram Afaq
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यूँँ न कर वस्ल के लम्हों को हवस से ता'बीर चंद पत्ते ही तो तोड़े हैं शजर से मैं ने
Khurram Afaq
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बुरा बनता हूँ कि शायद ऐसे वो मिरे सामने अच्छा बन जाए
Khurram Afaq
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