मसरूफ़ियत में ख़्वाब बन आए है वो महबूब तो चंचल बड़ा ही है मिरा
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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ज़रूरत नहीं इत्र की अब हमें ख़यालो से तेरे महक हम गए
Abha sethi
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नाम तेरे ज़िंदगी अपनी यूँँ लिखते बन हँसी ता-उम्र तेरे लब पे दिखते
Abha sethi
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क्या ही मज़ा बिन इन के भी सुख दुख ही तो जुद्रीन है
Abha sethi
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तुम्हें कुछ यूँँ भी ख़ुद में है जिया मैं ने तिरी यादों का हर क़तरा पिया मैं ने
Abha sethi
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ये ज़िन्दगी ग़मगीन है ले साध वो परवीन है
Abha sethi
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