ये ज़िन्दगी ग़मगीन है ले साध वो परवीन है
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है
Jaun Elia
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ज़ुल्फ़ों में सजा मुझे लो अपनी तुम बना के गुल बन सदा-बहार मैं खिला रहूँगा साए में
Abha sethi
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यूँँ तो है दफ़्तर में काम बहुत फिर भी निकाल लेते वक़्त तसव्वुर का तेरे
Abha sethi
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तुम्हें कुछ यूँँ भी ख़ुद में है जिया मैं ने तिरी यादों का हर क़तरा पिया मैं ने
Abha sethi
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मुड़ के थे देखा किए हम भी तो उस को फिर तो लाज़िम था ख़ुदा उस का हो जाना
Abha sethi
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ज़ीस्त की आभा मरम्मत में कई ख़ुशनुमा लम्हे जिए बिन बह गए
Abha sethi
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