यूँँ तो है दफ़्तर में काम बहुत फिर भी निकाल लेते वक़्त तसव्वुर का तेरे
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़ीस्त की आभा मरम्मत में कई ख़ुशनुमा लम्हे जिए बिन बह गए
Abha sethi
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ज़रूरत नहीं इत्र की अब हमें ख़यालो से तेरे महक हम गए
Abha sethi
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ज़ुल्फ़ों में सजा मुझे लो अपनी तुम बना के गुल बन सदा-बहार मैं खिला रहूँगा साए में
Abha sethi
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क्या ही मज़ा बिन इन के भी सुख दुख ही तो जुद्रीन है
Abha sethi
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ये इश्क़ ज़िंदा रखने को हैं टूट जाते गुल कई
Abha sethi
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