ज़ुल्फ़ों में सजा मुझे लो अपनी तुम बना के गुल बन सदा-बहार मैं खिला रहूँगा साए में
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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तुम्हें कुछ यूँँ भी ख़ुद में है जिया मैं ने तिरी यादों का हर क़तरा पिया मैं ने
Abha sethi
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पल पल खनकती बातें करती है लगे जैसे के हो चंचल सी बातूनी सखी पाज़ेब ये जी आप की
Abha sethi
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टूट के बिखरूँ तो सुकूँ मेरा तेरी ही बाँहों का बिछोना हो
Abha sethi
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ज़रूरत नहीं इत्र की अब हमें ख़यालो से तेरे महक हम गए
Abha sethi
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नाम तेरे ज़िंदगी अपनी यूँँ लिखते बन हँसी ता-उम्र तेरे लब पे दिखते
Abha sethi
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