मतलब पता है आदमी को हुक्म का मगर औरत को ही गु़लाम का मतलब नहीं पता
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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हमेशा इक दूसरे के हक़ में दुआ करेंगे ये तय हुआ था मिलें या बिछड़ें मगर तुम्हीं से वफ़ा करेंगे ये तय हुआ था
Shabeena Adeeb
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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समझ आ गया हम को इनकार के बा'द है बस दर्द काँटों में फूलों में आँसू
Rohit tewatia 'Ishq'
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मेरे इक काम में तुम साथ दोगी तुम्हारा दिल चुराना चाहता हूँ
Rohit tewatia 'Ishq'
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मैं अपने बाप सा अच्छा नहीं हूँ मेरा हिस्सा तुम्हें देना पड़ेगा
Rohit tewatia 'Ishq'
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वो है मेआ'र इश्क़ का जानाँ लोग मरते हैं बस निभाने को
Rohit tewatia 'Ishq'
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वो भले लाख सितम ढाए सही लगता है उस पे साबित कोई इल्ज़ाम नहीं हो सकता
Rohit tewatia 'Ishq'
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