मौत के साथ हुई है मिरी शादी सो 'ज़फ़र' उम्र के आख़िरी लम्हात में दूल्हा हुआ मैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते हैं कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई?
Umair Najmi
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दो गज़ सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है ऐ मौत तू ने मुझे ज़मींदार कर दिया
Rahat Indori
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सारे का सारा तो मेरा भी नहीं और वो शख़्स बे-वफ़ा भी नहीं ग़ौर से देखने पे बोली है शादी से पहले सोचना भी नहीं
Kushal Dauneria
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वो सूरत देख ली हम ने तो फिर कुछ भी न देखा अभी वर्ना पड़ी थी एक दुनिया देखने को
Zafar Iqbal
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तुम ही बतलाओ कि उस की क़द्र क्या होगी तुम्हें जो मोहब्बत मुफ़्त में मिल जाए आसानी के साथ
Zafar Iqbal
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ख़ुद को तरतीब दिया आख़िर-ए-कार अज़-सर-ए-नौ ज़िंदगी में तेरा इन्कार बहुत काम आया
Zafar Iqbal
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सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा मैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिर
Zafar Iqbal
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तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी
Zafar Iqbal
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