मिरी सुब्ह का यूँँ भी इज़हार हो पियाला हो कॉफ़ी का अख़बार हो कोई जुर्म साबित न हो उस का फिर जो तेरी हँसी में गिरफ़्तार हो
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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जौन' उठता है यूँँ कहो या'नी 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
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वो जो पागल था अब वो कैसा है ऐसे वो पूछता है हाल मेरा
Swapnil Tiwari
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गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है
Swapnil Tiwari
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ये ज़िंदगी जो पुकारे तो शक सा होता है कहीं अभी तो मुझे ख़ुद-कुशी नहीं करनी
Swapnil Tiwari
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तुम्हारा ख़्वाब भी आए तो नींद पूरी हो मैं सो तो जाऊँगा नींद आने की दवा ले कर
Swapnil Tiwari
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जलते दिए सा इक बोसा रख कर उस ने चमक बढ़ा दी है मेरी पेशानी की
Swapnil Tiwari
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