मेरी आमद से भला क्यूँ आइने डरने लगे मेरे हाथों में तो साहिल कोई पत्थर भी नहीं
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
Bashir Badr
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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पहले तकता रहा खिड़की से वो ख़ामोशी से और फिर कार की रफ़्तार बढ़ा दी उस ने
Wajid Husain Sahil
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जो कह रहे हैं आप वो कर क्यूँँ नहीं जाते जीने से शिकायत है तो मर क्यूँँ नहीं जाते
Wajid Husain Sahil
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ज़िंदगी में तो चले आते हैं कुछ लोग ऐसे दिल में रहते हैं, निगाहों से उतर जाते हैं
Wajid Husain Sahil
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ख़्याल बन के ज़माने को याद आएँगे हम ऐसे शख़्स कहाँ, जो भुला दिए जाएँ
Wajid Husain Sahil
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वो हाथों से निकलते जा रहे हैं जिन्हें सर पे बिठाना चाहता हूँ
Wajid Husain Sahil
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