ख़्याल बन के ज़माने को याद आएँगे हम ऐसे शख़्स कहाँ, जो भुला दिए जाएँ
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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हम को यारों ने याद भी न रखा 'जौन' यारों के यार थे हम तो
Jaun Elia
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो अपने हाथों से खिलाया था तुझे तेरी गाली से मुझे याद आया कितने तानों से बचाया था तुझे
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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सब्र आने की देर है वरना तू भी दिल से उतर ही जाएगा
Wajid Husain Sahil
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वो शख़्स जो नज़रों से बहुत दूर है लेकिन पहरो उसे तकता हूँ मैं ख़्वाबों में बुला कर
Wajid Husain Sahil
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कुछ देर तो रहा वो निगाहों के सामने फिर यूँँ हुआ कि मुझ में ही तहलील हो गया
Wajid Husain Sahil
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तेरे मेरे मिलन का ख़्वाब नाज़ुक आइने सा है लगे आवाज़ का पत्थर तो सपना टूट जाता है
Wajid Husain Sahil
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कैसी अब सालगिरह कैसी बधाई लोगों वो जो बिछड़ा तो मेरी उम्र घटा दी उस ने
Wajid Husain Sahil
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